Bank Account Frozen Over a Cyber Fraud Case? Here's the Complete Process to Fix It
अगर अचानक आपका बैंक अकाउंट फ्रीज़ या होल्ड हो गया है, और समझ नहीं आ रहा आखिर क्यों — तो घबराइए मत, सबसे पहले ये समझिए किसी Cyber Crime Complaint में आपका अकाउंट आने का मतलब ये बिल्कुल नहीं कि आप किसी Fraud में शामिल हैं।
ज़्यादातर मामलों में होता ये है कि फ्रॉड का पैसा आपके अकाउंट से होकर गुज़रा होता है, बिना आपकी जानकारी के। और जब Investigation होती है, तो सिस्टम एहतियातन उस अकाउंट को होल्ड कर देता है।
आखिर ऐसा होता क्यों है? - Why This Happens: The Money Trail, Not the Person
साइबर फ्रॉड करने वाले पैसे को सीधे अपने पास नहीं रखते वो एक टेक्निक यूज़ करते हैं जिसे "Layring" कहते हैं, पैसे को एक अकाउंट से दूसरे अकाउंट में, फिर तीसरे में, इस तरह कई Accounts से होते हुए घुमाया जाता है। आखिर में तो पैसा यूज़ ही होना है — कभी Shopping में, कभी bill payment में, कभी किसी और खर्चे में।
इसी वजह से जब Police Officers मनी ट्रेल को ट्रैक करके अकाउंट्स पर एक्शन लेते हैं तो कई बार बीच में आए हुए Genuine accounts भी इसमें आ जाते हैं चाहे वो कोई बिज़नेस ओनर हों, Students हों, होममेकर हों, या सेल्फ हेल्प ग्रुप चलाने वाले हों।
ये पोस्ट किसके लिए है
ये गाइड खासतौर पर उन लोगों के लिए है जिनका अपना अकाउंट फ्रीज़ हुआ है किसी और के फ्रॉड की वजह से
इसके लिए प्रोसेस है ग्रिवांस रिड्रेसल मैकेनिज़्म (GRM), Grievance Redressal Mechanism
(अगर आपके साथ खुद फ्रॉड हुआ है और आपका पैसा फ्रॉडस्टर के अकाउंट में फ्रीज़ है, तो वो अलग प्रोसेस है — मनी रेस्टोरेशन मॉड्यूल (MRM) — जिस पर जल्द ही एक अलग, डिटेल्ड पोस्ट आएगी
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अगर आपका अकाउंट फ्रीज़ हुआ है - GRM Process
I4C के Deputy Director Akhilesh Gaur ने ये प्रोसेस डिटेल में समझाया है। स्टेप बाय स्टेप देखिए:
- बैंक ब्रांच जाएं — सबसे पहला काम है अपनी बैंक ब्रांच में जाना और वहां हेल्प डेस्क को बताना कि आपके अकाउंट पर cyber crime एक्शन हुआ है।
- एप्लीकेशन एक्सेप्ट होगी — हेल्प डेस्क आपकी एप्लीकेशन एक्सेप्ट करेगी।
- 7 दिन की Enhanced Due Diligence (EDD) — इसके बाद बैंक के पास 7 दिन का समय होता है ये वेरीफाई करने के लिए कि कहीं ये अकाउंट किसी फ्रॉड में तो शामिल नहीं।
- Grievance Raise होगा, नोडल ऑफिसर वेरीफाई करेंगे — यहां एक सेफ्टी चेक भी है: ग्रिवांस भले ब्रांच राइज़ करे, फाइनल वेरिफिकेशन Nodal Officer के पास जाता है, जिससे कोई फ्रॉडस्टर या Money Mule झूठा जेन्युइन बनकर सिस्टम का गलत फायदा न उठा पाए।
- ब्रांच बैंकिंग नहीं है तो? — जिन बैंकों की फिज़िकल ब्रांच नहीं है, वहां ईमेल या कस्टमर केयर के ज़रिए शिकायत दर्ज कराई जा सकती है। बैंक की टीम खुद उस ग्रिवांस को पोर्टल पर राइज़ कर देती है।
- रिजेक्ट हो जाए तो अपील करें — अगर पुलिस स्टेशन लेवल पर शिकायत रिजेक्ट हो जाती है, तो District Grievance Redressal Officer (DGRO) के पास, और उसके बाद स्टेट लेवल ऑफिसर के पास अपील की जा सकती है।
The Scam Hiding Inside the Solution
GRM पूरी तरह फ्री सर्विस है कोई भी अगर आपसे "जल्दी रिलीज़" के नाम पर पैसे मांगे, OTP या बैंक PIN मांगे, या खुद को नोडल ऑफिसर/एजेंट बताकर WhatsApp पर कॉन्टैक्ट करे — समझ जाइए ये दूसरा स्कैम है ऐसे किसी भी कॉन्टैक्ट की शिकायत सीधे 1930 पर करें
This breakdown is based on Episode 4 of the I4C CyberDost podcast series, where Akhilesh Gaur, Deputy Director at the Indian Cyber Crime Coordination Centre (I4C), Ministry of Home Affairs, walks through exactly this SOP. Worth watching directly for the full context.
This is general awareness information, not legal advice. Processes and thresholds are set by I4C/RBI and can be updated — always confirm current specifics with your bank's nodal officer or your nearest Cyber Cell.
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